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आचार्य और पड़िहार को राती घाटी पुरोधा अलंकरण भेंट

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संस्कृति शिक्षा और समर्पण, खेल, योग, कविता का सम्मान – श्रीमाली

बीकानेर । राती घाटी समिति की ओर से आज सन् 1992 से आज तक समिति के सतत सहयोगी रहे महादेव प्रसाद आचार्य और सरदार अली पड़िहार को राती घाटी राष्ट्रीय पुरोधा अलंकरण भेंट किए गए। दोनों महानुभावों को माला– शॉल एवं अभिनन्दन पत्र भेंट किए गए।
इस अवसर पर समिति के संस्थापक महामंत्री जानकी नारायण श्रीमाली ने कहा की महादेव प्रसाद आचार्य का जीवन संस्कार, शिक्षा एवं समर्पण का प्रतीक है और सरदार अली पड़िहार का जीवन खेल, योग, और कविता को समर्पित है। इस प्रकार यह सम्मान इन सद्गुणों शिक्षा, संस्कार, समर्पण एवं खेल, योग, कविता का सम्मान हैं। इस प्रकार के सम्मान से समाज को प्रेरणा मिलती हैं।

सरदार अली पड़िहार का सम्मान समिति पदाधिकारियों ने कवि चौपाल में जाकर किया, जहां नेमचंद गहलोत ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया। डॉ. कृष्णा आचार्य, बाबू लाल छंगानी और जानकी नारायण श्रीमाली ने राती घाटी युद्ध पर विचार रखे। सरदार अली पड़िहार ने राती घाटी और राव जैतसी पर लिखी मारवाड़ी कविता सुनाई और आभार प्रकट किया।

महादेव प्रसाद आचार्य का सम्मान उनके चौतीना कुआं स्थित निवास पर किया, जहां उनके बड़े भाई गौरीशंकर आचार्य ने सभी का स्वागत किया। समिति अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह बीका, उपाध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान ने कहा कि हम महादेव प्रसाद के शिष्य रहें हैं और उनके जीवन से प्रेरणा ली हैं। समिति उपाध्यक्ष पुरूषोत्तम सेवग और साहित्यकार जुगल किशोर पुरोहित ने आचार्य के समाज को योगदान पर भावुक होकर प्रकाश डाला।

महादेव प्रसाद आचार्य ने अपने जीवन के संस्मरण सुनाते हुए कहा कि दस वर्ष की आयु में मैं रामकृष्ण कुटीर में आया और फिर यहीं का होकर रह गया। यह जीवन रामकृष्ण– विवेकानंद भावधारा को समर्पित है। आचार्य के पुत्र देवीशंकर ने आभार प्रकट किया। आचार्य के संस्कारी संयुक्त परिवार के दर्शन कर प्रतिनिधियों को हर्ष हुआ।

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