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कुंभ में गुरु प्रवेश: आशातीत सफलताओं के खुलेंगे द्वार

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दुनिया में फैलेगा भारत का वर्चश्व

व्यापार के होंगे नए अनुबंध

प्राकृतिक आपदाओं व संक्रमण का योग

बीकानेर। गुरुदेव 20 नवम्बर को रोहिणी नक्षत्र और वृष के चंद्र में रात्रि 11 बजकर 15 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेगा । फिलहाल गुरु मंगल नक्षत्र का है । मंगल अभी 30 नवम्बर को उदय होगा। ज्योतिषाचार्य पं. गिरवर प्रसाद बिस्सा के अनुसार गुरु कर्क लग्न के समय कुंभ राशि में प्रवेश करेगा । इस समय गुरु शनि का द्विर्द्वादश योग बन रहा है तथा सूर्य चंद्र का ग्रहण योग भी बना है ।
इसलिए विश्व में भारत का वर्चश्व फैलेगा। विदेश नीति में अच्छी सफलता मिलेगी । विदेशों से व्यापार के नए अनुबंध होंगे । भारतीय राजनीति में नए आयाम स्थापित होंगे ।विपक्ष की भूमिका प्रभावी रूप से कामयाब होगी । सत्ता पक्ष के अहम फैसले आगामी दिनों में पार्टी के लिए नुकसान दायक सिद्ध होंगे । राजनीतिक हस्तियों के क्षति का योग कई राज्यो में सत्ता परिवर्तन का योग बन रहा है ।
राम मंदिर निर्माण अवरोध व मंदिर निर्माण के लिये गठित समिति का पुनर्गठन होगा । धर्मिक आयोजन के बहुलता के साथ साथ धार्मिक और सामाजिक उन्माद के कारण अशांति का माहौल बना रहेगा ।

पं. बिस्सा के अनुसार बाजार में मंदी की चाल का योग । विशेषरूप से सोना चांदी ओर खनिज पदार्थों में मंदी आएगी । आर्थिक सुधार कार्यक्रमों का असर नजर आएगा । कुछ बैंकों का विलय होगा । आरबीआई के अहम फैसलों से आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ेगा ।
निजीकरण हुई संस्थाओं के गड़बड़ी की घटनाओं से देश को आर्थिक क्षति होगी। न्यायालय के फैसले सरकार के विरुद्ध होने से सत्तापक्ष आहत होगा । जनहित में ज्यादा फैसले होंगे।

इस दौर में संक्रमण रोग फैलने से शासन प्रशासन और आमजन को परेशानी होगी । 30 अप्रेल तक सावधानी रखनी होगी नहीं तो संक्रमण रोग फिर तेज़ी से फैलेगा ।
गुरु शनि के द्विर्द्वादश योग के कारण प्राकृतिक प्रकोप अधिक होगा । भूकम्प ,भस्खलन और अवांछित वर्षा के कारण किसानों और आम जन को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा ।

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