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शिक्षित बेटियों से समाज में आएगा बदलाव- भाटी, उच्च शिक्षा मंत्री

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– अन्तराष्ट्रीय बालिका दिवस कार्यक्रम आयोजित
– उच्च शिक्षामंत्री भंवर सिंह भाटी ने बालिकाओं को किया सम्मानित

बीकानेर। अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर कार्यालय अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा द्वारा महारानी सुदर्शना कन्या विद्यालय परिसर में सोमवार को उच्च शिक्षामंत्री भंवर सिंह भाटी के मुख्य आतिथ्य में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियां अर्जित करने वाली प्रतिभावान बालिकाओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उच्च शिक्षामंत्री भंवर सिंह भाटी ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के स्मक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में लूणकरनसर, नोखा, कोलायत, खाजूवाला, श्रीडूंगरगढ़ ब्लॉक के विभिन्न विद्यालयों से आई बालिकाओं ने प्रदर्शनी में उनके द्वारा तैयार किए गए विभिन्न विषयों पर आधारित विज्ञान, गणित, भारत की महिलाओं के कानूनी अधिकार एवं हारेगा कोरोना जीतेगा इण्डिया सहित विभिन्न मॉडल को प्रदर्शित किया। छात्रा एनसीसी कैडेट्स ने उच्च शिक्षामंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर्स दिया। मंत्री भंवर सिंह भाटी ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बालिकाओं द्वारा प्रदर्शित किए गए मॉडलस्् को सराहा और उनकी प्रशंषा की। इस अवसर पर उच्च शिक्षामंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने एवं विभिन्न परीक्षाओं में अच्छे नम्बरों से उतीर्ण होने वाली बालिकाओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा राजस्थानी लोकगीतों पर नृत्यों की प्रस्तुति भी दी गई।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उच्च शिक्षामंत्री भंवर सिंह भाटी ने अन्तराष्ट्रीय बालिका दिवस पर सभी बालिकाओं को बधाई एवं शुभकानाएं देते हुए कहा कि हम सभी लोगों को यह समझना व मानना चाहिए कि हमारी बेटियां हमारा अभिमान हैं। उन्होंने कहा कि नवरात्रा का समय चल रहा है, नवरात्रा में हम माँ दुर्गा का पूजन करते हैं और मां दुर्गा को बेटियों व मातृशक्ति के रूप में मानते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी बेटियां हमारे घर साक्षात दुर्गा के रूप में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ये जो बेटियां हैं, इनका मान सम्मान, इनकी सुरक्षा आज से नहीं है लाखों वर्षों से देश और दुनियां में यह परम्परा चली आ रही है। उन्होंने कहा कि सम्मानित होने वाली इन बच्चियों ने बीकानेर का और अपने विद्यालय, अपने परिवार, अपने गांव का जिला स्तर पर ही नहीं बल्कि प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन किया है।
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का यह उदेश्य है कि समाज में जागरूकता लाकर बालिका के अधिकारों का संरक्षण किया जाए, उनके समक्ष आने वाली चुनौतियों एवं कठिनाईयों की पहचान कर समाज में जागरूकता लाकर बालकों के समान अधिकार दिलवाना व मानव अधिकारों में उनकी मदद करना है। उन्होंने कार्यक्रम में आए अभिभावकों से कहा कि हमारी बेटियों को आगे बढ़ने के लिए उन्हें पूरी सुविधाएं देनी चाहिए, उनकी पूरी मदद करनी चाहिए तभी तो निश्चित रूप से समाज में बदलाव आया है। बेटे और बेटी में जो फर्क कई वर्षों पहले किया जाता था, आज वो नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी बेटी पढ़ेगी तो हमारे घर के साथ साथ कई परिवारों को रोशन करेगी ।
उच्च शिक्षामंत्री ने कहा कि राजस्थान सरकार के द्वारा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में बेटियों के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं व अभियान चलाए गए हैं। पिछली बार भी उनका पानी बचाओ, बिजली बचाओ और बेटी पढाओ उनका नारा था और उसी नारे को इस बार आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने छात्रवृत्ति सहित बहुत सारी स्कीम्स की घोषणा की है। राष्ट्रीय बालिका दिवस, अन्तरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि साईकिल वितरण का दायरा बढ़ाया गया है जो हमारी प्रतिभावान मेधावी बालिकाएं हैं, उन्हें 8वीं के पश्चात साईकिल देने की जो योजना है उसका दायरा बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि 12वीं पास करने के बाद मेधावी बालिकाओ को दी जाने वाली स्कूटी वितरण की योजना का दायरा भी बढाया गया है। पहले जहां 2 हजार 500 स्कूटी बालिकाओं को दी जाती थी, वहीं अब मुख्यमंत्री ने इसका दायरा बढ़ाकर 12 हजार 500 स्कूटी राजस्थान में देने का निर्णय लिया है, जिससे कॉलेज तक पहुंचने में हमारी बेटियों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो। उसके साथ साथ गार्गी पुरस्कार, इन्दिरा प्रियदर्शनी पुरस्कार यह विभिन्न प्रकार के पुरस्कारों से बालिकाओं को सम्मानित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 12 वीं क्लास पास करने के बाद बालिकाओं को शहरी क्षेत्र में जाना पड़ता है, जिससे उन्हें काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। बहुत सी बालिकाओं को पढाई भी छोड़नी पड़ती है। उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा मुख्यमंत्री से निवेदन किया गया कि कॉलेज ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा खोलने चाहिए। जिससे बेटियां अपने घर के नजदीक-अपनी तहसील के नजदीक पढ़ सके। उन्होंने कहा कि 2018 से पूर्व राजस्थान में 230 ही राजकीय महाविद्यालय थे। पिछले ढाई सालों में 123 नए राजकीय महाविद्यालय राजस्थान में खोले गए हैं, जिसमें बीकानेर में बज्जू, छत्तरगढ़, देशनोक, हदा में महाविद्यालय खोले गए हैं। नोखा व श्रीडूंगरगढ़ में बालिका महाविद्यालय की मांग पर महाविद्यालय शुरू कर दिए गए हैं। कोलायत काॅलेज में नए संकाए शुरू किए गए हैं इसके साथ-साथ बालिकाओं की नए सब्जेक्ट शुरू करने की मांग पर नए पॉपूलर सब्जेक्ट शुरू कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का विजन है कि स्कूल के साथ साथ कॉलेजों में भी बालिकाओं को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं दी जाएं। उन्होंने बताया कि राजस्थान में जो 123 कॉलेज खोले गए हैं, उनमें से 32 नवीन कन्या महाविद्यालय हैं।
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग बीकानेर मण्डल के संयुक्त निदेशक तेजा सिंह ने कहा कि आज बड़ा ही हर्ष का विषय है कि हम अंतराष्ट्रीय बालिका दिवस मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेटिया आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, यह हम सबके लिए बहुत गर्व की बात है। हमारी बेटियां विभिन्न क्षेत्रों अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर अपने अपने क्षेत्र का नाम रोशन कर रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलाते द्वारा शुरू की गई योजनओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम में जिला समन्वयक (रमसा) हेतराम सहारण ने बालिकाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा स्कूटी वितरण, लैपटॉप, छात्रवृृत्ति सहित शिक्षा के क्षेत्र में चलाई जा रही योजनओं की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन मोनिका गौड़ ने किया।
कार्यक्रम में उप निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग शारदा चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) सुरेन्द्र सिंह भाटी समग्र शिक्षा के कार्यक्रम अधिकारी राम चन्द्र चारण, एम.एस. बालिका उ. मा. विद्यालय की प्राचार्य सुमन, श्रीकिसन चौधरी, पृथ्वीराज लेघा, सहायक परियोजना अधिकारी समसा कैलाश बड़गुजर सहित शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित बड़ी संख्या में बालिकाएं उपस्थित थी।

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