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1999 शिक्षक भर्ती प्रकरण पर विधायक सिद्धि ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

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बीकानेर । तेईस साल पुराने तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती प्रकरण को लेकर चयनित बेरोजगार पत्थर पत्थर देव पूजन की तर्ज पर राजस्थान की तमाम पक्ष विपक्ष के नेताओं के आगे गुहार लगाई, लेकिन किसी ने सुना नहीं, किसी ने देखा नहीं ।ऐसा प्रतीत होता देशभर के राजनेता ज्ञापनों को लेने का दिखावा कर आमजन को ठगने का कार्य कर रहे हैं। बड़ी बात इन चयनित बेरोजगार शिक्षकों की है जो पिछले 23 साल से संघर्ष में जुटे हुए हैं। इन शिक्षकों ने इन सालों में सभी पार्टियों की सरकारें देख ली, लेकिन अपना हक हासिल करने के जज्बे में कोई कमी नहीं आई। इसी जज्बे के चलते आज 23 अगस्त को जिला परिषद बीकानेर शिक्षकभर्ती 1999 का एक प्रतिनिधि मण्डल पंकजआचार्य एवं इंद्र जोशी के नेतृत्व में न्याय प्राप्ति अभियान के तहत बीकानेर पूर्व की विथायक सिद्धि कुमारी से मिला और उन्हें अपनी पीड़ा से अवगत करवाया। उन्होंने मुख्पमंत्री अशोक गहलोत से पत्र लिख कर बेरोजगारों की पैरवी को लेकर चर्चा की,जिसमे विधायक सिद्धि ने 23 साल के संघर्ष की कहानी पर पीड़ा जाहिर करते हुवे तत्काल..अपने पीए से इस पर मुख्यमंत्री को पत्र भिजवाने के निर्देश दिए।
विदित हो इस मामले में कई बार बीकानेर जिला परिषद में वर्ष 1999 में चयनित शिक्षकों को नियुक्ति देने का आग्रह मुख्यमंत्री से किया था ।
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में विधायक सिद्धि कुमारी ने कहा जिला परिषद् बीकानेर मे 1999 मे 250 पदों पर भर्ती निकाली एवं जिसके लिए सम्पूर्ण भर्ती प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई, मगर एक सरकारी आदेश के माध्यम से इस पर रोक लगा दी गई,जो इस भर्ती प्रक्रिया के लम्बित होने का कारण बना।
सिद्धि कुमारी ने पत्र में कहा कि चयनित बेरोजगार लम्बे समय से संघर्षरत है और कई बार आमरण – अनशन तक हुआ, लेकिन तत्कालीन आश्वासन से ही अनशन समाप्त करना पड़ा। इसी संघर्ष के मध्य विभाग ने कई बार पत्र लिख कर सरकार से मार्गदर्शन माँगा जिसमे ये स्पष्ट अंकित किया है कि यदि सरकार निर्देश दे तो इस भर्ती को पूर्ण किया जा सकता है।
इस प्रकरण में किसी भी प्रकार की कोर्ट की रोक नहीं है और सरकार ने रोक लगाई है। वर्ष 2013 में तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक वी .श्रवण कुमार ने सरकार से भर्ती हेतु मार्गदर्शन एवं अनुमति माँगी थी, मगर उस पर भी कोई कार्यवाही नही हो पाई । मुख्यमंत्री को दिए पत्र में कहा राज्य सरकार ने 1/7/2003 को शिक्षा सचिव के माध्यम से आदेश भी जारी किये लेकिन वे आज दिनांक तक क्रियान्वित नही हो पाये, जबकि राज्य सरकार के पत्रांक एफ /13(244) प्रा.शि. वि./99 दिनांक 1/7/2003 को 250 पद हैतु वित्तिय स्वीकृति भी शासन सचिव विधि प्रकोष्ठ द्वारा दी जा चुकी है । 1999 अध्यापक भर्ती प्रकरण पर न्यायालय की किसी प्रकार की रोक नही,केवल सरकारी रोक है,जिसे "राज्य सरकार अपने स्तर पर हटाने मे सक्षम है,यदि सरकार रोक हटाती है तो इस प्रकरण का निस्तारण हो सकता है

सरकार के मुख्य शासन सचिव व पंचायती राज के प्रमुख शासन सचिव को भी पत्र भेजा है ।
प्रतिनिधि मण्डल में रामनारायण्, धुड़ाराम श्री लाल पुरोहित, जितेन्द्र श्रीमाली आदि समिल्लित थे।

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